जीत है जीवन का एक नया दिन
अधुरा है संसार इसके बिन
हार लेकर आता है अंधकार
पर इसके बिन सपने नहीं होते साकार
दिन रत का आना जाना स्वाभाविक
यह बात तू जन ले ओ नाविक
जिसने हार का मुख न देखा
वह कैसे पार करेगा जीत की रेखा
पराजय के बिन विजय का आनंद अधुरा
ये दोनों न मिले तो जीवन का सार न पूरा
जो हार देख घबरा गया
लक्ष्य पथ छोड़ कर भाग गया
उसे जय की ख़ुशी न मिले
जीवन के आँगन में फूल न खिले
जीत प्राप्त करने हार को अपनाना होगा
हार और जीत जीवन के दो पहलु है ,समझाना होगा
1 comment:
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