
बचपन मे हम सिर्फ़ लडाईयान करते
एक दूसरे की हमेशा करते शिकायत
आज मेरी हर गलती पर डाट नही ,
मिलती है उससे नासियत
हमारी नोक -झोक की आवाज़ से
गून्ज्ती रेह्ती थी गलियान
आज जो रास्ते मे काटे आये
खिला दे वो वहा भी कलियान
उन मीठई मीठई टक्ररारो से ही
मजबूत हुआ हमारा रिश्ता
मेरे जीवन मे उसकी जगह है
जैसे आसमान से आया कोइ फ़रिश्ता
मेरा सबसे अच्छा दोस्त
सर्व -प्रथम और सर्व -श्रेष्ट गुरु
आज मेरी जो शक्सियत है
कहनी उसिसे हुइ थी शुरु
आज मेरे अस्तित्व की
नीव है जिसने बनाई
मेरी पेह्चन है जिसकी वजह् से
वो है मेरा प्यारा भाई