Sunday, May 16, 2010

दिल ढूढ़ रहा है

दिल के किसी कोने में
एक ख्वाहिश होती है
कब मुलाकात होगी उससे
दुनिया जिसकी सिर्फ हमसे होती है

दिन रात ये पलके हमारी
ढूंढती रहती है उस परछाई को
जिसके आने की आहात ही
छु जाये दिल की हरगहराई को

कोई तो होगा इस दुनिया में
जिसे देख मुस्कुराये ये नज़रें
आँखों में जो नमी आये
चुरा ले वोह उसे अपने लव्सो से

इंतज़ार में विचलित है
ये दिल , ये धड़कन , ये सांसें
शरीर से रूह छूटने को है
अब तो बस उसकी आंस में

ये दिल ढूंढ रहा है
हर लम्हा , हर पल , हर घडी
जिसके ख्वाबो को संजोया है
उसकी मूरत कब सामने होगी खड़ी