Saturday, June 4, 2011

हार और जीत



जीत  है  जीवन  का  एक  नया  दिन 
अधुरा  है  संसार  इसके  बिन 

हार  लेकर  आता  है  अंधकार 
पर  इसके  बिन  सपने   नहीं  होते   साकार   

दिन  रत  का  आना  जाना  स्वाभाविक 
यह  बात  तू  जन  ले  ओ  नाविक 

जिसने  हार  का  मुख  न  देखा 
वह  कैसे  पार  करेगा  जीत  की  रेखा 

पराजय  के  बिन  विजय  का  आनंद   अधुरा 
ये दोनों  न  मिले  तो  जीवन  का  सार  न  पूरा 

जो  हार  देख  घबरा  गया 
लक्ष्य  पथ  छोड़  कर   भाग  गया 

उसे  जय  की  ख़ुशी  न  मिले 
जीवन  के  आँगन  में  फूल  न  खिले 

जीत  प्राप्त  करने  हार  को  अपनाना  होगा 
हार  और  जीत जीवन  के  दो  पहलु  है  ,समझाना  होगा