दिल के किसी कोने में
एक ख्वाहिश होती है
कब मुलाकात होगी उससे
दुनिया जिसकी सिर्फ हमसे होती है
दिन रात ये पलके हमारी
ढूंढती रहती है उस परछाई को
जिसके आने की आहात ही
छु जाये दिल की हरगहराई को
कोई तो होगा इस दुनिया में
जिसे देख मुस्कुराये ये नज़रें
आँखों में जो नमी आये
चुरा ले वोह उसे अपने लव्सो से
इंतज़ार में विचलित है
ये दिल , ये धड़कन , ये सांसें
शरीर से रूह छूटने को है
अब तो बस उसकी आंस में
ये दिल ढूंढ रहा है
हर लम्हा , हर पल , हर घडी
जिसके ख्वाबो को संजोया है
उसकी मूरत कब सामने होगी खड़ी
1 comment:
WILL YOU FORGIVE ME?
IF I TELL YOU THAT I AM SORRY....
WILL YOU FORGIVE ME?
IF I PROMISE YOU, THAT IT WILL NOT HAPPEN AGAIN...
WILL YOU FORGIVE ME?
IF I TELL YOU THAT I NEVER MEANT TO HURT YOU....
WILL YOU FORGIVE ME?
IF I TELL U THAT I AM READY TO DO ANYTHING TO MAKE YOU FEEL HAPPY....
WILL YOU FORGIVE ME?
IF I SAY THAT THERE ARE NOT ENOUGH WORDS TO DESCRIBE, HOW PATHETIC I AM FEELING....
WILL YOU FORGIVE ME?
IF I CONFESS THAT WHAT SCARES ME THE MOST IS THIS THOUGHT AND THIS FEELINGS, TOO....
I AM REALLY VERY SORRY?
THAT YOU MIGHT WANT TO GIVE UPON ME....
WILL YOU FORGIVE ME?
PLEASE DO!
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