Saturday, April 10, 2010

यह ज़िन्दगी क्या है ??

यह ज़िन्दगी क्या है ?

ये बात किसी की समझ में न आई

कोई कहता है इसे विशाल पर्वत

तो कोई छोटी सी राइ ;


यह ज़िन्दगी क्या है ?

ये तो है कोई पहेली

जिसने इसे सुलझा दिया

उसने अपनी दुनिया जी ली ;


यह ज़िन्दगी क्या है ?

ये है एक विशाल मेला

इसमें कई लोग आते जाते है

कुछ साथियो के साथ तो कोई अकेला ;


यह ज़िन्दगी क्या है ?

ये है किसी रेलगाड़ी का सफ़र

किसका साथ कितना रहे

ये आश्रित है ,मुसाफिरों के आने जाने पर ;


यह ज़िन्दगी क्या है ?

ये खेल है एक शतरंज का

जिसकी चल अधिक सटीक

वो हो जाये हक़दार जीत का ;


यह ज़िन्दगी क्या है ?

ये है विचारो का समझोता

जो इसके आधार पे चले वो सुखी

इसका उलंघन करने पर , वह अंत में रोता ;


यह ज़िन्दगी क्या है ?

इस बात का जिसने उत्तर पाया

उसकी रूह हो जाए अमर

भले ही , मिटटी में मिले उसकी काया ........



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