यह ज़िन्दगी क्या है ?
ये बात किसी की समझ में न आई
कोई कहता है इसे विशाल पर्वत
तो कोई छोटी सी राइ ;
यह ज़िन्दगी क्या है ?
ये तो है कोई पहेली
जिसने इसे सुलझा दिया
उसने अपनी दुनिया जी ली ;
यह ज़िन्दगी क्या है ?
ये है एक विशाल मेला
इसमें कई लोग आते जाते है
कुछ साथियो के साथ तो कोई अकेला ;
यह ज़िन्दगी क्या है ?
ये है किसी रेलगाड़ी का सफ़र
किसका साथ कितना रहे
ये आश्रित है ,मुसाफिरों के आने जाने पर ;
यह ज़िन्दगी क्या है ?
ये खेल है एक शतरंज का
जिसकी चल अधिक सटीक
वो हो जाये हक़दार जीत का ;
यह ज़िन्दगी क्या है ?
ये है विचारो का समझोता
जो इसके आधार पे चले वो सुखी
इसका उलंघन करने पर , वह अंत में रोता ;
यह ज़िन्दगी क्या है ?
इस बात का जिसने उत्तर पाया
उसकी रूह हो जाए अमर
भले ही , मिटटी में मिले उसकी काया ........
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